केंद्र सरकार ने केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) को अधिक संवेदनशील और नागरिकों के लिए बनाने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। आइए इस पहल से संबंधित मुख्य बिंदुओं और अतिरिक्त जानकारी पर नज़र डालते हैं: दिशानिर्देशों के मुख्य बिंदु सुलभ
नोडल अधिकारियों की नियुक्तिः प्रत्येक मंत्रालय/विभाग कुशल शिकायत निपटान के लिए जिम्मेदार नोडल अधिकारियों को नियुक्त करेगा ।
समर्पित शिकायत कक्षः प्रत्येक मंत्रालय / विभाग में नागरिकों की शिकायतों के निपटान के लिए पर्याप्त संसाधनों से सुसज्जित समर्पित शिकायत कक्ष स्थापित किए जाएंगे। • • प्रतिपुष्टि और अपील प्रणाली: ० नागरिक हल की गई शिकायतों पर एसएमएस, ईमेल या कॉल सेंटर के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
यदि असंतुष्ट होते हैं, तो वे वरिष्ठ अधिकारियों के पास अपील दाखिल कर सकते हैं। एआई-समर्थित विश्लेषणः प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके नागरिकों की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करेगी और शिकायत निपटान प्रक्रियाओं में सुधार करेगी ।
प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: CPGRAMS पर काम करने वाले शिकायत अधिकारी SEVOTTAM योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे । CPGRAMS के बारे में • उद्देश्यः CPGRAMS नागरिकों के लिए केंद्र सरकार या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए एक सामान्य खुला मंच है।
उत्पत्तिः प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने 2007 में CPGRAMS की स्थापना की।
उपलब्धियाँ: 2022 से 2024 के बीच, CPGRAMS ने लगभग 60 लाख सार्वजनिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निवारण किया। ● शिकायत निवारण की समयसीमा 30 दिनों से घटाकर 21 दिन कर दी गई है। 02022 में, सरकार ने CPGRAMS के लिए 10 सूत्रीय सुधार योजना लागू की, जिसमें CPGRAMS 7.0 का सार्वभौमिकरण और एआई/ एमएल का उपयोग करके तात्कालिक शिकायतों का स्वतः पहचान शामिल था। शिकायत निवारण के लिए अन्य पहलें
PRAGATI प्लेटफार्मः इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) द्वारा विकसित, PRAGATI एक इंटरैक्टिव, आईसीटी-आधारित प्लेटफार्म है जो आम लोगों की शिकायतों का समाधान करता है।
INGRAM पोर्टलः उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा लॉन्च किया गया, एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (INGRAM) उपभोक्ता शिकायतों पर केंद्रित है ।
सेवोत्तम सेवा वितरण उत्कृष्टता मॉडल: DARPG द्वारा 2006 में विकसित इस मॉडल का उद्देश्य पूरे देश में सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार करना है।